उत्तराखंड की प्रसिद्ध महिलाएं जिन्होंने विश्व में मनवाया अपना लोहा

उत्तराखंड में अनेकों महान विभूतियाँ हुई हैं, किन्तु अगर बात की जाए महिलाओं की तो पहाड़ की महिलाओं ने वाकई समाज पर अपनी छाप छोड़ी है| महिलाओं ने हमेशा समाज सुधार, पर्यावरण, स्वतंत्रता संग्राम और राज्य आन्दोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है| आज हम कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में आपको बताएँगे, आपको लगे कि किसी का नाम रह गया है तो कृपया कमेंट कर जरुर बताएं|

तीलू रौतेलीउत्तराखंड की लक्ष्मी बाई

तीलू रौतेली गढ़वाल की सबसे प्रसिद्ध वीरांगना है और आज भी उन्हें याद किया जाता है। तीलू ने कत्यूरियों के खिलाफ युद्ध लड़े और हर जगह कत्यूरियों को परास्त किया। तीलू की घोड़ी का नाम बिंदुली था और आज भी उनकी याद में बीरोंखाल ब्लाक में हर वर्ष में कौथिग का आयोजन किया जाता।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

source: google

 

जिया रानीकुमाऊँ की लक्ष्मी बाई

जिया रानी का जन्म हरिद्वार(मायापुर) में सन ११९२ को हुआ था उनके पिता  हरिद्वार के राजा अमरदेव सिंह पुंडीर थे और उनका विवाह कत्युर राजा प्रीतम पाल से हुआ था। जिया रानी ने तैमुर की सेना को परास्त किया किन्तु दूसरी बार जब जिया रानी की सेना थोडा निश्चिंत हुई तैमुर की सेना ने उन पर आक्रमण किया और जियारानी की सेना की हार हुई।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

source: google

 

गौरा देवीचिपको वुमन

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो गौरा देवी को नहीं जानता होगा। चमोली के लाता गाँव में जन्मी गौर देवी की शादी रेणी गाँव के निवासी मेहरबान सिंह से हुई। अपने गाँव में वनों की रक्षा करते हुए इन्होने चिपको आन्दोलन शुरू किया जो संपूर्ण देश में काफी प्रचलित हुआ।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

source: google

 

दीपा देवीटिन्चरी माई

उत्तराखंड में शराब विरोधी आंदोलन एवं शिक्षा के क्षेत्र में इनका सराहनीय योगदान रहा।गढ़वाल में 50 के दसक में दवाई के नाम पर बिकने वाली टिन्च्री की 60 दुकानों को बंद करवाने में एवं बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने (खासतौर पर बालिकों को) में और स्कूलों का निर्माण करवाने में इन्होने अहम् भूमिका निभाई। टिन्चरी दरअसल एक आयुर्वेदिक थी किन्तु गढ़वाल में इसका दुरूपयोग किया गया।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

source: google

मिस केथरीन हेलिमेनसरला बहिन

लन्दन में जन्मी मिस कैथरीन हेलिमेन गांधी जी से इतना प्रभावित थी कि वे इंग्लैंड छोड़ भारत में बस गयी और यहाँ उनका नाम सरला बहिन पड़ गया। वे एक गाँधीवादी, राष्ट्रवादी नारीवादी और समाजवादी महिल्ला थी और उन्होंने कुमाऊँ में पर्यावरण, स्वतंत्रता आंदोलन, पहाड़ में नारी उत्थान आदि विषयों में काम करते हुए अपना सारा जीवन दे दिया। उन्होंने कौसानी में महिला उत्थान के लिए लक्ष्मी आश्रम की स्थापना भी करी।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

source: google

रानी कर्णावती: नाक-कटी-रानी

जब 30 हजार सैनिकों के साथ मुग़ल सेनापति नजाबत खान ने गढ़वाल पर चडाई कर दी। पहाड़ी क्षेत्र से अपरिचित मुग़ल सैनिकों का फायदा उठाते हुए गढ़वाल नरेश पृथ्वी शाह की पत्नी रानी कर्णावती ने उन्हें घाटी में घेर लिया।अब मुग़ल सैनिक न पीछे मुड पाए न आगे जा पाए। धीरे धीरे मुग़ल सैनिकों के होसले परास्त होने लगे और सेनापति नजाबत खान ने रानी के पास संधि सन्देश भेजा किन्तु रानी कर्णावती ने उसे ठुकरा दिया। यद्यपि रानी कर्णावती ने मुग़ल सैनिकों को जीवन दान देने के लिए हामी भर दी किन्तु सारे मुग़ल सैनिकों को अपनी नाक कटवानी पड़ी, इसके बाद से रानी कर्णावती का उपनाम नाक-कटी-रानी पड गया।

इनके बारे में संपूर्ण जानकारी के लिए यह क्लिक करें

Please follow and like us:

About the Author

PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *