क्या ख़ास है कुमाउनी होली में, सारा देश कुमाऊ का कायल

एक मोती दो हार, हीरा चमकी राह्यो,

चमकी राह्यो आधी रात, हीरा चमकी राह्यो,

एक मोती दो हार…

रोहणी के बुधवार, भादो की रात में,

कृष्ण भयो अवतार, हीरा चमकी राह्यो,

एक मोती दो हार……

बासुदेव-देवकी की बंदी खुली गयो,

बजरा को केवाड, हीरा चमकी राह्यो,

एक मोती दो हार….

लेकर बालक सिर पै धरो है,

चल जमुना के तीर, हीरा चमकी राह्यो,

एक मोती दो हार…

कुमाऊ के होली के अलग ही रंग देखने को मिल जाते है| कुमाऊ में होली बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है| इस होली में केवल गुलाल नहीं होते, कुमाऊ की होली में रीती रिवाज का अनूठा मेल देखने को मिलता है|

कुमाउनी होली की विशेषता बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली होती है| कुमाऊ की होली की शुरुआत बसंत पंचमी से होती है, होली की विशेषता लोकगीत होते हैं जिन्हें सभी भरपूर जोश और उत्साह से गाते है और झूमते है|

कुमाउनी होली की शुरुआत चम्पावत के चंद राजाओं के दरबार से हुई थी| कुमाऊ में चंद राजाओं के बढ़ते राज की वजह से कुमाऊ में यह रीती चलन में आ गयी और आज कुमाऊ संस्कृति की एक अहम हिस्सा बन गयी है|

बैठकी होली:

बैठकी होली, होली का एक रूप है जिसे बैठ कर मनाया जाता है| यह लगभग एक महीने तक मनाई जाती है, जो कि बसंत पंचमी से शुरू होती है और होली तक मनाई जाती है| कुमाऊ के कुछ क्षेत्रों में यह होली तो सर्दियों से ही मनाई जाती है| एक निश्चित स्थान या मंदिर में हुल्यार इकठ्ठा होते है| जहाँ गीत गा कर त्यौहार मनाया जाता है|

खड़ी होली:

खड़ी होली भी लगभग बैठकी होली के आस पास शुरू होती है| इस होली में पुरुष और महिलाएं लोकगीत गा कर और नृत्य करते है| समूह में लोग घर घर जा कर सबसे से मिलते है और लोकगीत गाते है| अलग अलग लोकगीत कुमाऊ में प्रचलित हैं| एक लोकगीत निम्न है:

गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो – २

तुम हो बृज की सुन्दर गोरी,

मैं मथुरा को मतवारो चुंदरि चादर सभी रंगे हैं,

फागुन ऐसे रखवारो,

गौरी प्यारो… सब सखिया मिल खेल रहे हैं,

दिलवर को दिल है न्यारो गौरी प्यारो…………………………..

महिला होली:

महिला होली में महिलायें ही हिस्सा लेती है और लोकगीत गाती हैं| यह होली मंडली बना कर मनाई जाती है जहां पुरुष नहीं आते| कुछ पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार है:

 जबसे पिया परदेश सिधारे,

आम लगावे बागन में, बलमा घर…

चैत मास में वन फल पाके,

आम जी पाके सावन में, बलमा घर…

कुमाउनी होली हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है| आप सभी होली की हार्दिक शुभकामनायें

 

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About the Author

PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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