बुरांश | उत्तराखंड के राजकीय फूल में है बहुत औषधीय गुण | जानिये क्या है ऐसा ख़ास

उत्तराखंड में कुछ ऐसे पहाड़ी फल और फूल पाए जाते हैं जिनके बारे में आपको जानना चाहिए क्योंकि ये है बहुत फायदेमंद | उनमे से एक है बुरांश:

बुरांश: बुरांश एक सुन्दर व मनमोहक फूल है,जो कि वसंत ऋतु में ऊँची पहाडियों पर खिलता है| यह फूल समुद्रतल से 1500-3600 मीटर कि ऊंचाई पर पहाड़ो पर उगता है|बुरांश का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रन एर्बोरियम(Rhododendron arboreum) है | रोडोडेंड्रन(Rhododendron) जो कि एक ग्रीक शब्द है,जिसका मतलब रोड(rhod) या गुलाब(rose) और डेंड्रन(dendron) मतलब पेड़ होता है|

प्राचीन समय से ही आयुर्वेद में बुरांश के फूल का इस्तेमाल होता आया है|बुरांश का फूल कही रंगों में होता है,जैसे गुलाबी,लाल और सफ़ेद रंग|लाल रंग का बुरांश का फूल सबसे अधिक पोषण देने वाला होता है,इस रंग के ही फूल का ही ओषधीय महत्व है|बुरांश का फूल केवल विशेष मौसम में ही खिलता है|बुरांश उत्तराखंड का राज्य वृक्ष होने के साथ-साथ हिमांचल प्रदेश और नागालैंड का भी राज्य वृक्ष है|खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध बुरांश नेपाल का भी राष्ट्रीय वृक्ष है,भारत में बुरांश कि लगभग 80 प्रजातियाँ और उप प्रजातियाँ पाई जाती है|

बुरांश भारत के अलावा नेपाल,भूटान,म्यांमार,चीन और श्रीलंका सहित कही अन्य देशों में भी पाया जाता है|अब तक का बुरांश का सबसे ऊँचा पेड़ नागालैंड में पाया गया जिसकी ऊंचाई 108 फीट थी जिसे 1993 में नागालैंड द्वारा गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया|

बुरांश फूल के पोषण का महत्व:बुरांश फूल मुख्य रूप से फाइबर प्रदान करता है और पोटेशियम,कैल्शियम और आयरन का अच्छा स्त्रोत है|फ्लैनोइड क्वार्सेटीन विटामिन कि वजह से इस पुष्प का रंग लाल होता है|तीन जैविक रूप से पाए जाने वाला सक्रिय यौगिकों – क्वार्सेटीन, रटिन और क्वॉमरिक एसिड इस फूल में पाए जाते हैं। दिलचस्प यह है कि ये तीन एसिड सेब में भी पाये जाते हैं और इसके स्वास्थ्य लाभ के लिए जिम्मेदार हैं।

बुरांश का उपयोग: बुरांश के फूल को धार्मिक माना जाता है और धार्मिक कार्यों और सजावट के प्रयोजनों में उपयोग में लिया जाता है|जैली जैसे बनावट के साथ गुलाब या स्ट्रॉबेरी ड्रिंक के समान उज्ज्वल लाल, बुरांश फूल के जूस का स्वाद मीठा और आनंदमय होता है,जिससे इसको शरबत के तौर पर एक पेय के रूप में उपयोग किया जाता है|बुरांश के पेड़ से प्राप्त लकड़ी का उपयोग विभिन्न उदेश्यों के लिए किया जाता है जिसमे कि ईंधन की लकड़ी,पैकेजिंग और कलाकृतियों का निर्माण शामिल है|बुरांश पेड़ से प्राप्त सूखी पत्तियों का उपयोग गौशालाओं में जानवरों के आसन में बिछाने के रूप में किया जाता है|

बुरांश से होने वाले फायदे: प्राचीन समय में बुरांश के फूल और पत्तियों का उपयोग घावों को ठीक करने सहित पेट से जुड़ी अन्य बीमारियों को ठीक करने में किया जाता था| बुरांश का जूस किडनी की अशुद्दियों को दूर करता है| इसमें एंटीऑक्सीडेंट,एंटीइन्फ्लामेंट के अलावा ह्रदय और लिवर प्रोटेक्टिव तत्व मौजूद होते हैं| इसके अलावा रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने और हड्डियों के सामान्य दर्द के लिए इसका जूस बहुत लाभदायक होता है| इसको जूस के साथ-साथ चटनी,मुरब्बा के रूप में भी लिया जाता है|

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