उत्तराखंड की प्रसिद्ध महिलाएं जिन्होंने विश्व में मनवाया अपना लोहा

उत्तराखंड की प्रसिद्ध महिलाएं जिन्होंने विश्व में मनवाया अपना लोहा

उत्तराखंड में अनेकों महान विभूतियाँ हुई हैं, किन्तु अगर बात की जाए महिलाओं की तो पहाड़ की महिलाओं ने वाकई समाज पर अपनी छाप छोड़ी है| महिलाओं ने हमेशा समाज सुधार, पर्यावरण, स्वतंत्रता संग्राम और राज्य आन्दोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है| आज हम कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में आपको बताएँगे, आपको लगे कि किसी का नाम […]

तीलू रौतेली कहलाती हैं गढ़वाल की लक्ष्मी बाई, पढ़िए ऐसा क्या किया इन्होने

तीलू रौतेली कहलाती हैं गढ़वाल की लक्ष्मी बाई, पढ़िए ऐसा क्या किया इन्होने

15 वर्ष की आयु में कोई क्या कर सकता है? इस बात का जवाब देती है गढ़वाल की वीरांगन तीलू रौतेली की कहानी। 15 वर्ष की अल्पायु में युद्ध भूमि में कूदने वाली वीरांगना थी तीलू रौतेली। तीलू ने दुश्मन को छटी का दूध याद दिला दिया था। सात वर्ष तक युद्ध भूमि में शत्रु के दांत खट्टे करने वाली […]

तैमुर लंग की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे कुमाऊँ की रानी लक्ष्मी बाई “जिया रानी” ने, पढ़िए इनकी कहानी

तैमुर लंग की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे कुमाऊँ की रानी लक्ष्मी बाई “जिया रानी” ने, पढ़िए इनकी कहानी

जिया रानी हरिद्वार(मायापुर) के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थी। उनके बचपन का नाम मौला देवी था। उस समय मध्य भारत में तुर्कों का राज था। तुर्क राजा संपूर्ण भारत पर राज करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कई बार उत्तराखंड पर आक्रमण किये। उस समय हरिद्वार पर मौला देवी के पिता अमरदेव पुंडीर राज कर रहे थे। तुर्क आक्रमण के […]

चिपको वुमन के नाम से मशहूर है गौरा देवी, पढ़िए इनके बारे में

चिपको वुमन के नाम से मशहूर है गौरा देवी, पढ़िए इनके बारे में

“भाइयों ये जंगल हमारी प्रकृति माता के घर के जेसा है यहाँ से हमें फल, फूल, सब्जियां आदि मिलती हैं अगर यहाँ के पेड़ पौधों को काटोगे तो निश्चित ही बाढ आएगी।” चिपको आन्दोलन के कुछ सालों बाद एक इंटरव्यू में यह कहने वाली गौरा देवी थी। गौरा एक निर्भीक और साहसी महिला थी। उन दिनों पहाड़ों में पेड़ कटान […]

पहाड़ के शराब विरोध आन्दोलन में रहा “टिन्चरी माई” का महत्वपूर्ण योगदान, पढिये इनके बारे में

पहाड़ के शराब विरोध आन्दोलन में रहा “टिन्चरी माई” का महत्वपूर्ण योगदान, पढिये इनके बारे में

1940-50 के दशक तक प्रदेश के किसी भी परिवार में शराब पीने वाला नहीं था। 1861 में तत्कालीन कुमाऊं के सीनियर कमीश्नर गाइल्स ने आबकारी प्रशासन की रिपोर्ट में लिखा था कि पर्वतीय लोग नशे के व्यसन से मुक्त हैं। हालांकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कुछ जनजातियों के बनाए विशेष तरल नशे के प्रयोग भी बात जरूर कही थी। (स्रोत: […]

इन्होने किया गाँधी जी के साथ पहाड़ के लिए काम, मिस केथरीन हेलिमेन- सरला बहन

इन्होने किया गाँधी जी के साथ पहाड़ के लिए काम, मिस केथरीन हेलिमेन- सरला बहन

“सुनो केथरीन, ये निर्धारित किया गया है की तुम्हारा परिवार दुश्मन के साथ है और न ही तुम युद्ध में उपयोगी साबित होंगी तो तुम्हे छात्रवृति नहीं मिल सकती।” एक अध्यापक के मुह से ऐसी बात सुन कर बालिका केथरीन स्तब्ध थी। मिस केथरीन हेलिमेन या सरला बहिन समाज में नारी उत्थान और पर्यावरण के क्षेत्र में निभाई गयी अपनी […]

मुग़लों की नाक काट कर वापस भेजा था इस रानी ने। पढ़िए रानी कर्णावती के बारे में

मुग़लों की नाक काट कर वापस भेजा था इस रानी ने। पढ़िए रानी कर्णावती के बारे में

रानी कर्णावती पवार वंश के राजा, राजा महिपत शाह की पत्नी थी, महिपत शाह ही वह राजा थे जिन्होंने गढ़वाल की राजधानी देवलगढ़ से श्रीनगर स्थानांतरित करवाई थी। 1631 में महिपत शाह की मृत्यु के बाद राजा बने पृथ्वीपति शाह किन्तु 7 वर्ष की अलापयु में उनकी माँ रानी कर्णावती ने कार्यभार सम्भाला। जिस समय यह सब हुआ मुग़ल सल्तनत में […]

इतिहास में उत्तराखंड का इन नामों से है उल्लेख

इतिहास में उत्तराखंड का इन नामों से है उल्लेख

उत्तराखंड का इतिहास भी उतना ही पुराना है जितना संपूर्ण भारतवर्ष  का है। उत्तराखंड हमेशा से ही भारतीय संस्कृति से जुड़ा रहा है। इसका प्रमाण पौराणिक वेदों और ग्रंथों से भी मिलता है। वेदों और अलग अलग ग्रंथों में उत्तराखंड का उल्लेख अलग अलग नामों से किया गया है। कुछ नाम जिनका उपयोग उत्तराखंड के लिए किया गया है इस प्रकार से हैं: […]

आल वेथेर रोड के बारे में कुछ रोचक तथ्य, जिनको पढ़ कर हैरान हो जाएँगे आप

आल वेथेर रोड के बारे में कुछ रोचक तथ्य, जिनको पढ़ कर हैरान हो जाएँगे आप

कई मायनो में उत्तराखंड का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट आल वेदर रोड ही है, उत्तराखंड में भले ही टिहरी बाँध जेसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो चूका है किन्तु उसका फायदा कभी भी उत्तराखंड और उत्तराखंड वासियों को नहीं हो पाया। जानिये क्यों निराश हो कर देश छोड़ कर चले गये थे नोबल पुरस्कार विजेता हर […]

जानिये क्यों निराश हो कर देश छोड़ कर चले गये थे नोबल पुरस्कार विजेता हर गोविंग खुराना

जानिये क्यों निराश हो कर देश छोड़ कर चले गये थे नोबल पुरस्कार विजेता हर गोविंग खुराना

9 जनुअरी को हर गोविन्द खुराना की जयंती होती है, इस साल 96वी जयंती है। वह एक भारतीय अमेरिकी मूल के जैव-रसायनवैज्ञानिक थे। उन्होंने 1968 में मार्शल डब्लू नीरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्लू हौली के साथ फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार जीता। उनके शोध से पता चला कि केसे न्यूक्लियोटाइड्स में न्यूक्लिकियेटेड एसिड का क्रम (जिसमे कोशिका […]