आखिर क्यों कहा जाता है उत्तरखंड को 52 गढ़ो का देश।

गढ़वाल के इतिहास में बावन गढ़ों का विशेष महत्व है। सदियों पुराने इन सभी गढ़ों से कोई न कोई ऐतिहासिक आख्यान भी जुड़ा हुआ है, जो इन गढ़ों की विशेषता को भी दर्शाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसे बावन गढ़ो का देश क्यों कहा जाता है।

असल में पहले गढ़वाल में 52 छोटे छोटे ठकुरी गढ़ थे जिनपे 52 राजाओं का आधिपत्य था, उनके अलग अलग राज्य थे और वे स्वतंत्र थे  इन 52 गढ़ों के अलावा भी कुछ छोटे छोटे गढ़ थे जो सरदार या थोकदारों (तत्कालीन पदवी) के अधीन थे। ये राज्य आपस मैं लड़ते रहते थे और लगभग 250 सालो तक यही स्थिति बनी रही।

इसके बाद 1358 मैं राजा अजयपाल आये, राजा अजयपाल ने इन 52 छोटे छोटे ठाकुरी गढ़ो के तमाम राजाओं को परास्त करके गढ़वाल का नक्शा एक कर दिया था। और 52 छोटे छोटे गढ़ो का यह समूह गढ़वाल कहलाया।

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उतराखंड 52 गढ

नागपुर गढ      भटनाग      तपोगढ

लोदनगढ      बनगढ      रानी गढ

कोली गढ      भरदार गढ      श्रीगुरु गढ

रावड गढ      चौन्दकोट गढ   बधाण गढ

फ़ल्याण गढ   नयाल गढ      लोहाव गढ

बान्गर गढ      अजमीर गढ      दशोली गढ

कुइलीगढ/जोराशी गढ   कोडागढ      कन्डारी गढ

भरपूर गढ      साबली गढ      धोना गढ

कुन्जडी गढ      बदलपुरगढ      रतन गढ

सिलगढ      सन्गेलागढ      एराशू गढ

मून्गर गढ      जोट गढ      इडिया गढ

रैन्का गढ      गुजुडू गढ      लगूर गढ

मौल्या गढ      देवल गढ      बागगढ

उप्पू गढ      लोहा गढ      बडकोट गढ

नालागढ      जौलपुरागढ      विराल्य गढ

सान्करी गढ      चम्पागढ      चान्दपुर गढ

 

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Ashish Rawat

An Engineer by profession, thinker by choice and a pahari by birth. I am tech trainer and runs a coaching institute as well as an web development firm.

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