शराब सेवन और प्रतिबंध | हैरान करने वाले तथ्य

उत्तराखंड में शराब बंदी को लेकर जन मानुष काफी आक्रोशित है| किन्तु क्या आपको यह पता है बहुत ही कम ऐसे राज्य हैं जो उत्तराखंड से कम शराब का सेवन करते हैं| हालांकि हम शराब सेवन का समर्थन नहीं करते हैं किन्तु यह बताना चाहते हैं की उत्तराखंड के हालत देश के कई राज्यों से बेहतर हैं| आज हम शराब से जुड़े कुछ अनजान तथ्य बताने वाले हैं, जो कि पूर्णतय डव्लू एच ओ की रिपोर्ट पर आधारित है|

-विश्व में सालाना एक व्यक्ति 6.2 लीटर शराब गटक जाता है| भारत में औसतन प्रति व्यक्ति 4.3 लीटर शराब पिता है| ग्रामीण भारत का हाल और भी बुरा है, भारत का ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति 11.4 लीटर गटक जाता है|

-भारत की विशाल आबादी का 30% हिस्सा उनका है जो शराब का सेवन करते हैं| भारत में यह बहुत् ज्यादा है जबकि विदेशों के विपरीत भारत में यह अवधारणा है की महिलायें शराब नहीं पी सकती | और इसीलिए भारत की महिलायें शराब का सेवन नहीं करती| विश्व की 38.3 % जनसँख्या शराब का सेवन करती है|

-2015 की रिपोर्ट की माने तो सन 1992 से 2012 के बीच शराब का सेवन करने वालों की तादाद में 55% का इजाफा हुआ है| जो कि वाकई चिंतनीय विषय है|

-दादरा और नगर हवेली, अरुणांचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश और सिक्किम में देश में सबसे ज्यादा शराब का सेवन होता है| जहां अंडमान में  प्रति व्यक्ति एक दिन में 656 मिलीलीटर शराब का सेवन करता है वहीं उत्तराखंड में यह संख्या 38 मिलीलीटर|

-शराब का सेवन करने से अनेक प्रकार की बीमारियाँ होती है, लीवर से जुडी बीमारियाँ आम है| रिपोर्ट की माने तो सन 2012 में भारत में 33 लाख लोगों की मृत्यु शराब की वजह से हुई थी| WHO की एक रिपोर्ट इयर्स फॉर लाइफ लॉस्ट स्केल की माने तो भारत को उस स्केल (1-5 ) पर 4 अंक दिए गए इसका मतलब है हर भारतीयों की अकाल मृत्यु का एक मुख्या कारण शराब का सेवन है|

-शराब के स्वास्थ्य पर जितने नुक्सान हैं उनसे कई ज्यादा नुक्सान समाज का होता है| भारत में घर के मुखिया (कमाने वाला व्यक्ति) का शराब की लत के चपेट में आने की 10 गुना ज्यादा संभावना होती हैं|

प्रतिबंध कितना कारगर??

गुजरात, बिहार, लक्षद्वीप, मणिपुर आदि राज्यों में शराब के सेवन और बेच खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है| लेकिन यह कितना कारगर है वह इस बात से पता चल जाता है की शराब से जुड़े अपराध इन राज्यों में बहुत ज्यादा हैं| आंध्र प्रदेश, हरयाणा, मिजोरम और तमिल नाडू में भी शराब पर प्रतिबंध लगाया गया था| किन्तु विरोध के चलते उसे हटा दिया गया|

इतिहास में झांके तो पता चलता है, जिस भी राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगाकर समाज का बहुत फायदा नहीं हुआ है| अपितु अपराध बढ़ गया है| जानवर को जब बाँधा जाए तो वह और भी उग्र हो जाता है, एसे में प्रतिबंध शराब से जुडी परेशानियों का उत्तर नहीं| उत्तराखंड के हालात अभी देश के अन्य राज्यों से बेहतर हैं, ऐसे में शिक्षा एवं जागरूकता फैला कर राज्य और समूचे देश का कल्याण हो सकता है|

इस विषय पर आपके विचार आमंत्रित हैं| अपने अमूल्य विचार को जरुर साझा करें|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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