क्या है उत्तराखंड और नेपाल के बीच कालापानी विवाद | दोक्लम जैसा ही है ट्राईजंक्शन

क्या है उत्तराखंड और नेपाल के बीच कालापानी विवाद | दोक्लम जैसा ही है ट्राईजंक्शन

कालापानी उत्तराखंड के पिथोरागढ़ जिले के नेपाल बॉर्डर के पास का क्षेत्र है| यह चीन भारत और नेपाल के बीच ट्राईजंक्शन है| यह क्षेत्र फिलहाल भारत के अधीन है और 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद से ही भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस फ़ोर्स यहाँ पर तेनात है| जब अंग्रजों ने कुमाऊ पर अपना अधिकार जमाया था, गोरखाओ और अंग्रेजो के बीच […]

5 बचपन की यादें, जो ले जाएंगी हर पहाड़ी को वापस बचपन में

5 बचपन की यादें, जो ले जाएंगी हर पहाड़ी को वापस बचपन में

आजकल का बचपन स्मार्ट फ़ोन, कंप्यूटर आदि टेक्नोलॉजी में शायद कहीं खो गया है| पुराने दिन भी क्या दिन थे जब बच्चे कोदा झंगोरा खा कर भी खुश रहते थे| टॉफ़ी, चॉकलेट तब भी थी लेकिन उनकी लालसा बचपन पर कभी हावी नहीं हो पायी| आज हम ऐसे ही कुछ यादगार लम्हे आपके साथ बांटना चाहते हैं, जिन्हें पढ़ निश्चित […]

पिछोड़ा- उत्तराखंड की वेशभूषा और संस्कृति का है अहम हिस्सा

पिछोड़ा- उत्तराखंड की वेशभूषा और संस्कृति का है अहम हिस्सा

महेंद्र सिंह धोनी की धर्मपत्नी साक्षी धोनी ने जब अपने विवाह में कुमाउनी पिछोड़ा पहना तो सारा देश पिछोड़ा का दीवाना हो गया| पिछोड़ा उत्तराखंड की वेशभूषा और ट्रेडिशनल ड्रेस का अहम हिस्सा है| जब कभी उत्तराखंड के पहनावे और आभूषण की बात आती है तो पिछोड़ा ही याद आता है| पिछोड़ा का  कुमाउनी संस्कृति में पिछोड़ा का बहुत महत्व […]

उत्तराखंड की शान बाल मिठाई | इतिहास और बनाने की विधि

उत्तराखंड की शान बाल मिठाई | इतिहास और बनाने की विधि

अगर आप उत्तराखंड से है या आप कभी उत्तराखंड गए हैं तो आपने निश्चित ही बाल मिठाई के बारे में सुना होगा| कुमाऊ के अल्मोडा में जन्मी इस मिठाई अपनी पहचान समूचे विश्व में बनाई हैं| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में भी बाल मिठाई काफी मशहूर है| इस पोस्ट में हम आज आपको बाल मिठाई के बारे में बताएँगे और बाल […]

शराब सेवन और प्रतिबंध | हैरान करने वाले तथ्य

शराब सेवन और प्रतिबंध | हैरान करने वाले तथ्य

उत्तराखंड में शराब बंदी को लेकर जन मानुष काफी आक्रोशित है| किन्तु क्या आपको यह पता है बहुत ही कम ऐसे राज्य हैं जो उत्तराखंड से कम शराब का सेवन करते हैं| हालांकि हम शराब सेवन का समर्थन नहीं करते हैं किन्तु यह बताना चाहते हैं की उत्तराखंड के हालत देश के कई राज्यों से बेहतर हैं| आज हम शराब […]

उत्तराखंड या हिमांचल | कौन सा पहाड़ी राज्य है बेहतर

उत्तराखंड या हिमांचल | कौन सा पहाड़ी राज्य है बेहतर

एक ओर उत्तराखंड और दूसरी ओर हिमांचल प्रदेश, दोनों पहाड़ी राज्य कई मायनों में एक जैसे है| दोनों राज्य अपनी सौन्दर्य और खुश मिजाज मौसम के लिए मशहूर हैं| कौन सा राज्य बेहतर है यह इस बात पर निर्भर करता है की पैमाना क्या है| दोनों ही राज्य अलग अलग क्षेत्रों में बेहतर है| आज हम ऐसे ही अलग अलग […]

उत्तराखंडी परंपरागत आभूषण जो समय के साथ लुप्त हो रहे हैं।

उत्तराखंडी परंपरागत आभूषण जो समय के साथ लुप्त हो रहे हैं।

उत्तराखंड की संस्कृति मैं विविधता  भिन्न-भिन्न पहलुओं मैं देखने को मिलते है चाहे वह बोली-भाषा हो, कोई त्यौहार हो या फिर परिधान या चाहे परंपरागत आभूषण, हर मायने मैं उत्तराखण्डी संस्कृति का अतुल्य परिचय मिलता है। इससे पहले हमने टिहरी नथ के बारे मैं आपको बताया आज हम आपको परंपरागत उत्तराखंडी  आभूषण के बारे मैं बताएँगे। सिर में पहने जाने वाले […]

बदरीनाथ धाम हुआ करता था पहले तिब्बत में | भगवान भाग कर आये उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम हुआ करता था पहले तिब्बत में | भगवान भाग कर आये उत्तराखंड

तिब्बत और हिमालयी राज्य हिमांचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के पौराणिक समय से ही गहरे सम्बन्ध रहे हैं| इन राज्यों और तिब्बत में बहुत सी समानता देखने को मिलती रही है| शंकराचार्य के उत्तर भारत में आने से पूर्व इस क्षेत्र में बोद्ध धर्मं का बोल बाला था| इसी कारण अब तिब्बत और उत्तर भारत के रीती रिवाज, खान […]

टिहरी नथ: हर गढ़वाली महिला की शोभा

टिहरी नथ: हर गढ़वाली महिला की शोभा

जब एक गढ़वाली दुल्हन अपनी दुल्हन की पोशाक़ मैं आती है तो देखने वालों की नज़रे उसकी नथ पर होती है जो की एक प्रमुख आभूषण है, नथ को गढ़वाली भाषा(न की बोली ) मैं नथुली कहा जाता है। टिहरी नथ या ‘नथुली’ गढ़वाली महिलाओं का आकर्षण है जो अपनी मनोहर शैली के लिए जानी जाती  है। यह एक बड़ी नोज रिंग […]

स्वंतंत्रता संग्राम में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की भूमिका | जब गाँधी जी ने भी की थी तारीफ़

स्वंतंत्रता संग्राम में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की भूमिका | जब गाँधी जी ने भी की थी तारीफ़

जब भी हम अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों के बारे में बात करते हैं, हम जलियांवाला बाग नरसंहार का उल्लेख करना नहीं भूलते। यह वास्तव में एक बर्बर और भारत इतिहास में एक शर्मनाक घटना थी। 13 अप्रैल, 191 को जनरल दैन के नेतृत्व में ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिक जल्लाएनवाला बाग में शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले भीड़ पर गोलीबारी […]