कुमाऊ के चंद वंश के कुछ प्रमुख राजा

कुमाऊ में चंद वंश और कत्युरी वंश समकालीन थे और हमेशा से ही दोनों वंशों के बीच संघर्ष चलता रहा किन्तु अंत में चंद राजाओं की जीत हुई और कुमाऊ पर चंद वंश का कब्ज़ा हो गया| 11वी शताब्दी में थोथर चंद ने चंद वंश की स्थापना करी थी| प्रारंभ में चंद वंश के अधीन राज्य की राजधानी चम्पावत थी किन्तु कत्युरी वंश के बाद संपूर्ण कुमाऊ पर प्रभुत्व के कारण राजा भीष्म चंद ने राजधानी अल्मोड़ा कर दी| उस समय तक चंद राजाओं ने लगभग संपूर्ण कुमाऊ और नेपाल के कुछ हिस्सों पर अपना राज कायम कर लिया था|

हालांकि चंद वंश वर्षो से कुमाऊ में था किन्तु कत्युरी वंश के अंत के बाद ही चंद वंश पूर्ण रूप से स्थापित हुआ| थोथर चंद के बाद चंद वंश के राजा कुछ इस प्रकार से हैं:

  1. थोथर चंद
  2. अभय चंद
  3. ज्ञान चंद
  4. विक्रम चंद
  5. भारती चंद
  6. रत्न चाँद
  7. कीर्ति चंद
  8. प्रताप चंद
  9. भीष्म चंद
  10. कल्याण चन्द III
  11. अजित चंद
  12. कल्याण चंद IV
  13. महेंद्र चंद

चम्पावत से अल्मोड़ा राजधानी स्थान्तरित भीष्म चंद ने करी थी लेकिन काम पूरा कल्याण चंद III के काल में हो पाया था| महेंद्र चंद चंद वंश के आखरी राजा थे उसके बाद राज्य पर गोरखाओं का कब्जा हो गया था| चंद वंश के कुछ प्रमुख राजा निम्न हैं:

रूद्र चंद ( 1565-1597इ०):

रूद्र चंद बाल कल्याण चंद के पुत्र थे जिन्होंने सिरा पर कब्जा किया था| रूद्र चंद ने ही पहली बार गढ़वाल पर आक्रमण किया था| रूद्र चंद धार्मिक प्रविर्ती के थे और मुग़लों से चंद राजाओं के सम्बन्ध भी अच्छे थे और इसलिए उनको अकबरनामा में भारत के सबसे बड़े जमींदार बोला गया है|  राजा रूद्र चंद श्येनिक शास्त्र, उषा रूद्र गोदया, त्रेवानिक धर्मनिर्णय आदि ग्रंथों की भी रचना की है|

लक्ष्मी चंद (1597- 1638इ०):

राजा रूद्र चंद की मृत्यु के बाद लक्ष्मी चंद ने कुमाऊ पर शासन किया| उन्होंने भी गढ़वाल पर आक्रमण किया किन्तु सफल नहीं हो पाए| चंद राजाओं ने बहुत से मंदिर राज्य में बनवाये थे| राजा लक्ष्मी चंद ने बागेश्वर में बागनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था|

 बाज बहादुर (1638- 1678इ०):

source: wikipedia

राजा बाज बहदुर चंद राजाओं में सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे| उनके शाहजहाँ से अच्छे तालुकात थे| उन्होंने भी गढ़वाल पर आक्रमण किया और कुछ समय के लिए देहरादून और तराई क्षेत्र पर कब्जा किया| बाज बहादुर ने भीमताल के समीप घोडाखाल में गोलू देवता का मंदिर भी बनवाय था|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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