ब्रिटेन की रानी ने नवाजा था ब्रिटेन के सबसे बड़े शौर्य पुरस्कार विक्टोरिया क्रॉस से गढ़वाल राइफल्स के गब्बर सिंह नेगी को

गढ़वाल राइफल का इतिहास हमेशा से ही स्वर्णिम अक्षरों में ही लिखा गया है| गढ़वाल राइफल ने बहुत से वीर योधा दिए हैं चाहे हम वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की बात करें या महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह रावत की, उत्तराखंड ने कई वीर दिए हैं जिन्होंने अपना लोहा संपूर्ण विश्व में मनावाया| लेकिन आज हम एक ऐसे वीर की बात करने वाले हैं जिन्हें स्वयं ब्रिटेन की रानी ने ब्रिटेन का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया था| उस वीर का नाम राइफलमैन गब्बर सिंह नेगी है, जिसने मात्र 19 वर्ष की उम्र में रणभूमि में अपने पराकर्म का जो जोहर दिखाया कि जिसे देख ब्रिटिश भी हैरान हो गए|

39 गढ़वाल राइफल इन्फेंट्री की एक तस्वीर

ब्रिटेन के अखबार में कुछ ऐसी खबर छपी थी:

महामहिम राजा ने नीचे बताये गए व्यक्ति को बहादुरी और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए तथा अपने दल के साथ सराहनीय काम करने के लिए विक्टोरिया क्रॉस देने का निर्णय लिया है।

no. 1685 राइफलमैंन गब्बर सिंह नेगी , 2 बटालियन, 39 गढ़वाल राइफल्स

10 मार्च 1915 को नयूवे चेपल्ल में युद्ध में पराकर्म दिखने के लिए|

जर्मन मोर्चे पर आक्रमण के दौरान वे उस दल का हिस्सा थे जो मुख्य ट्रेंच के अन्दर घुसे और वे पहले व्यक्ति थे जो उन्हें पार करते हुए अन्दर घुसे और आक्रमण करते रहे जब तक दुश्मन में हार ना मान ली| इस दौरान उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए|

-लन्दन गजट की रिपोर्ट के अनुसार

गब्बर सिंह नेगी का जन्म 21 अप्रैल 1895 को उत्तराखंड के टिहरी जिले के मंजूड गाँव में हुआ था| गब्बर सिंह मात्र 17 साल की उम्र में सेना में भारती हो गए थे| 19 वर्ष की आयु में उन्हें पहले विश्व युद्ध में कामनवेल्थ देशों से लड़ने का मौका मिला और उन्हें फ्रांस भेजा गया| जहां उन्होंने अपने शौर्य का लोहा मनवाया| जर्मन मोर्चे पर आक्रमण के दौरान वे उस दल का हिस्सा थे जो मुख्य ट्रेंच के अन्दर घुसे और वे पहले व्यक्ति थे जो उन्हें पार करते हुए अन्दर घुसे और आक्रमण करते रहे जब तक दुश्मन में हार ना मान ली| इस दौरान उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए|

फ्रांस के नयूवे चेप्पल मेमोरियल में उनका नाम दर्ज है|

टिहरी जिले के चंबा में उनकी याद में हर वर्ष मेले का आयोजन किया जाता है| यह मेला उस क्षेत्र के सबसे बड़े मेलों में से एक है| हर वर्ष अप्रैल में इस मेले का आयोजन किया जाता है| 1971 से गढ़वाल राइफल्स इस मेले का आयोजन करती है जिसमे स्थानीय लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है और इस वीर को श्रधांजलि देने एकत्रित होते हैं| हर वर्ष गढ़वाल राइफल्स इस मेले का आयोजन करती है और भर्ती रैली का भी आयोजन करती है|

उत्तराखंड सेना प्रदेश है और यहाँ ऐसे वीर सपूतों का होना इस बात का प्रमाण है| विक्टोरिया क्रॉस गब्बर सिंह नेगी और उन्ही के जैसे कई वीर सदैव अमर रहेंगे| ऐसे वीरों को हमारा शत शत नमन|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

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