जानिये क्यों निराश हो कर देश छोड़ कर चले गये थे नोबल पुरस्कार विजेता हर गोविंग खुराना

9 जनुअरी को हर गोविन्द खुराना की जयंती होती है, इस साल 96वी जयंती है। वह एक भारतीय अमेरिकी मूल के जैव-रसायनवैज्ञानिक थे। उन्होंने 1968 में मार्शल डब्लू नीरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्लू हौली के साथ फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार जीता। उनके शोध से पता चला कि केसे न्यूक्लियोटाइड्स में न्यूक्लिकियेटेड एसिड का क्रम (जिसमे कोशिका का आनुवंशिक कोड होता है) कोशिका के प्रोटीन के संश्लेषण को नियंत्रित करता है। खुराना का जन्म रायपुर में हुआ था, जो की ब्रिटिश भारत (आज पाकिस्तान में कबीरवाला) का एक हिस्सा था। वह गणपत राय खुराना और कृष्ण देवी खुराना के पांच बच्चों में सबसे कम उम्र के थे। उन्होंने 1966 में अमेरिकी नागरिकता ले ली और उसके बाद का अपना जीवन अमेरिका में ही यापन किया। 9 नवम्बर 2011 को उनका निधन हो गया।

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गूगल ने भी आज का डूडल हर गोविन्द खुराना को समर्पित किया है। हर गोविन्द खुराना ने अपनी हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ लिवरपूल से पूरी की। जब वे वापस भारत लौटे तो उनके शोध के अनुरूप सुविधा और मौके न मिलने  की वजह से उनको वापस लौटना पड़ा। कई मायनो में उनका जाना भारत के लिये अच्छा भी था और नहीं भी। अगर वे नही जाते तो शायद भारत में रह कर ऐसी शोध ना कर पाते और अगर यही रुक कर नोबल पुरस्कार जीत जाते और सोने पर सुहागा हों जाता। आपकी इस बारे में क्या राय है हमें कमेंट कर जरुर बताएं।

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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