उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाली उत्तराखंड की सभी प्रमुख झीलें |

उत्तराखंड में सेकड़ों छोटी बड़ी झीलें हैं, लेकिन उनमे से कुछ ख़ास झीलें अक्सर राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं  में पूछी जाती हैं| आमतौर पर यह पूछा जाता है कि कौनसी झील क़िस जिले में है और कभी यह पूछा जाता है की उत्तराखंड की सबसे बड़ी या गहरी झील कौन सी है| काकभुशंडि ताल, सतोपंत, हेमकुंड, परी ताल, आछरी ताल सहस्त्रताल और देवरिया ताल आदि के बारे में अक्सर पुछा जाता है| आज हम आपको उत्तराखंड की प्रमुख झीलों के बारे में बता रहे हैं जो खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत लाभकारी होगी| तो पेश है “famous lakes of uttarakhand”.

चमोली:

  • कागभूषन्डी ताल – चमोली, हाथी पर्वत के पास स्थित यह ताल बेहद खूबसूरत है ऐसी मान्यता है की यहाँ कौवे मरने के लिए आते है|
  • सिद्धताल- चमोली
  • लिंगाताल या आंछरी ताल – चमोली, यह ताल फूलों की घाटी के मध्य स्थित है।
  • लोकपाल या हेमकुण – चमोली, इस ताल के किनारे सिक्ख धर्म के 10वें गुरु गोविन्द सिंह ने तपस्या की थी। यहां एक गुरुद्वारा हेमकुण्ड साहेब भी है। इसी स्थान से लक्ष्मण गंगा नदी का उद्गम है और नदी के किनारे लक्ष्मण जी का मंदिर भी है|
  • नरसिंहताल – चमोली।
  • मणिभद्रताल- चमोली
  • अरवाताल- चमोली
  • गोहनाताल- चमोली
  • विष्णुताल- चमोली
  • बेदनीताल – चमोली, इस ताल के निकट नन्दादेवी का मन्दिर है।
    विरहीताल/ गौना झील – चमोली
  • झलताल- चमोली
  • सतोपंथ सत्यपद ताल – चमोली, अंलकनदा नदी का उद्गम यही ताल है। यह त्रिकोण नुमा ताल है और यह भी मान्यता है कि इसके तीनों कोनो में ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी।
  • होमकुण्ड – चमोली, नंदा देवी राज जात यात्रा के दौरान इसी स्थान से खाडू को अकेला छोड़ा जाता है और तीर्थ यात्री यही तक जाते हैं|
  • रूपकुण्ड – चमोली, कहा जाता है की शिव-पार्वती कैलाश जाते हुए यहाँ आये थे और मा पार्वती ने अपने सौन्दर्य का आधा भाग इसी ताल में छोड़ दिया था जिसके कारण इसे रूपकुण्ड कहा जाता है।
  • मातृकाताल – चमोली।
  • ताराकुण्ड- चमोली
  • सुखताल- चमोली

नैनीताल:

  • नैनीताल – नैनीताल, इसे ऋषि सरोवर भी कहा जाता है। यह ताल 7 पर्वतों से घिरा हुआ है। नैनीताल दो भागों में बंटता है उत्तरी भाग को मल्लीताल और दक्षिणी भाग को तल्लीताल कहा जाता है। बालिया नदी का उद्गम स्थिल यहीं से है। कहा जाता है कि इस झील का जन्म माता सती के नयन गिरने से हुई था और इसी झील के किनारे माता नैनादेवी शक्तिपीठ मंदिर है जो कि 108 शक्ति पीठ मंदिरों में से एक है। इस झील की खोज सन 1841 में सी.पी. बैरन ने की थी।
  • भीमताल – नैनीताल
  • खुरपाताल- नैनीताल

उत्तरकाशी:

  • नचिकेता ताल – उत्तरकाशी
  • खिड़ा ताल –  उत्तरकाशी में स्थित इस ताल का जल अत्यन्त स्वच्छ है।
  • डोडी ताल – उत्तरकाशी, यह 6 कोनों वाला ताल है।
  • काणाताल – उत्तरकाशी, यह बिना जल वाला ताल है।
  • परीताल- उत्तरकाशी
  • केदारताल – उत्तरकाशी, गंगोत्री मार्ग पर स्थित है। यह ताल थलैयासागर, जोगिन तथा भृगपंथ पर्वतों से घिरा है।
  • फाचकण्डी बंया ताल – उत्तरकाशी, इस ताल का जल उबलता रहता है।
  • लामाताल- उत्तरकाशी
  • देवसाड़ी ताल- उत्तरकाशी
  • सरताल- उत्तरकाशी
  • भराणसरताल- उत्तरकाशी
  • रोहीसाड़ा ताल – उत्तरकाशी

टिहरी:

  • भिंलगताल-टिहरी
  • अप्सराताल – टिहरी, इसे अछरी ताल भी कहा जाता है।
  • महासर ताल – टिहरी, इन्हें भाई-बहन का ताल भी कहा जाता है।
  • यमताल – टिहरी, यह ताल सबसे ज्यादा बर्फ से ढका रहता है।
  • मंसूरताल – टिहरी , इस ताल से दूंधगंगा निकली है।
  • बासुकी ताल – टिहरी, यहां का जल का लाल है।
  • सहस्त्रताल – टिहरी, यह गढ़वाल क्षेत्र का सबसे बड़ा और गहरा ताल है।

पिथोरागढ़:

  • पार्वती सरोवर- पिथोरागढ़
  • जोलिंग्कोंग ताल- पिथोरागढ़
  • चिपलाकोट ताल- पिथोरागढ़
  • महेश्वरी ताल- पिथोरागढ़
  • थमरी कुंड- पिथोरागढ़

रुद्रप्रयाग:

  • चोराबाड़ी ताल – रुद्रप्रयाग, केदारनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित इस ताल को गांधी सरोवर भी कहा जाता है। गांधी जी की अस्थियां यहीं प्रवाहित की गई थी।
  • गौरी कुंड- रुद्रप्रयाग, केदारनाथ के रास्ते में पड़ने वाला वाहन का यह आखरी पड़ाव है|
  • देवरिया ताल – रुद्रप्रयाग, चोपता के पास स्थित यह ताल बेहद खूबसूरत है|
  • भेंकताल – रुद्रप्रयाग
  • बदाणी ताल – रुद्रप्रयाग, प्रत्येक वर्ष इसके किनारे मेला भी लगता है।

देहरादून:

  • चन्दबाड़ी ताल- देहरादून
  • काँसरोताल- देहरादून

पौड़ी:

  • दुग्धताल- पौड़ी

हरिद्वार:

  • दिव्य सरोवर-हरिद्वार

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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