उत्तराखंड की सबसे बड़ी नदी को पुराणों में कहा गया है “अपवित्र” | संपूर्ण कहानी

काली नदी पिथोरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे के पास स्थित कालापानी से निकलती है| इस नदी को कालापानी गाड, काली गंगा, शारदा और महाकाली के नाम से जाना जाता है| मुख्यतः नेपाल में इसे महाकाली के नाम से जाना जाता है| इस नदी का पौराणिक नाम श्यामा नदी भी है| स्कन्दपुराण के मानसखंड में काली नदी को श्यामा नदी कहा गया है| स्कन्दपुराण में ही इस नदी को अपवित्र कहा गया है|

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काली नदी की सहायक नदी पूर्वी धौलीगंगा (जो कि तावाघट में काली नदी में मिलती है) पर भारत का पहला कट ऑफ तकनीक से बना डैम भी बन चूका है| काली नदी और गोरीगंगा नदी जोलजिवी में मिलती हैं, जहां प्रसिद्ध जोलजीवी मेला भी लगता है| काली नदी जोगबुधा घाटी से निचे उतर कर मैदानी क्षेत्र में आती है| नेपाल से आने वाली नदियाँ रामगुण और लढ़िया नदी इस नदी में ही मिलती हैं, जिसके बाद काली नदी का नाम शारदा पड जाता है| टनकपुर होते हुए जब शारदा नदी उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पहुंचती है जहाँ इसे नया नाम सरयू मिलता है| बाद में सरयू नदी गंगा में मिल जाती है|

काली नदी पूर्ण रूप से कुमाऊ में बहती है और उत्तराखंड में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है| काली नदी की सहायक नदियों में मुख्यतः कुठीयांगटी, पूर्वी धौलीगंगा, गोरीगंगा आदि है|

स्कन्दपुराण में काली नदी को अपवित्र कहा गया है| हमारा मानना है वेदों और पुराणों में कहीं ना कहीं विज्ञान और तार्किक ज्ञान है| और इस नदी को अपवित्र नदी का दर्जा देने के पीछे भी कहीं न कहीं कोई तर्क होगा| आइये यही कारण जानने की कोशिश करते हैं|

काली नदी के आस पास घने जंगल हैं, जिनमे बहुत सारे जंगली जानवर रहते है जेसे भालू आदि| काली नदी के आस पास तट काफी तीखे हैं और ढाल भी बहुत तेज है जिस कारण इसके किनारे जाना बहुत खतरनाक हो जाता है और नदी में गिरने की संभावना बढ़ जाती है| काली नदी का बहाव भी बहुत तेज है, जिस कारण काली नदी काफी खतरनाक बन जाती है|

काली नदी को लेकर बहुत सारी लोकिक्तियाँ मशहूर हैं जेसे “काली नयो भालू खयो” जिसका मतलब है काली नदी में जाओगे तो भालू खा जाएगा और “काली जनारनै, स्वर्ग को ढंगारनै” जिसका मतलब है काली में जाओगे तो निश्चित ही स्वर्ग जाओगे| 

काली नदी कुमाऊ मंडल की प्रमिख नदियों में से एक है और नेपाल को अलग करती है| एनिमल प्लेनेट ने भी इस नदी पर रिवर मोंस्टर नामक डाक्यूमेंट्री सीरीज में इसके बारे में भी बताया गया है|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

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