कुमाऊ रेजिमेंट से जुड़े 5 रोचक तथ्य, गौरान्वित महसूस करेंगे आप

उत्तराखंड हमेशा से ही सेना का गढ़ रहा है| उत्तराखंड के दोनों रेजिमेंट गढ़वाल रायफल्स और कुमाऊ रेजिमेंट भारतीय सशत्र सेना के सबसे ज्यादा सुसजित दलों में से एक हैं| उत्तराखंड अपनी जनसँख्या के अनुसार सेना में सबसे ज्यादा सैनिक देने वाला राज्य है और यही इस बात का प्रमाण है कि गढ़वाल रायफल्स और कुमाऊ रेजिमेंट की गरिमा देश में अनूठी है| आज हम आपको कुमाओं रेजिमेंट के बारे में कुछ रोचक तथ्य (interesting facts) बतायेंगे जिन्हें आपको जरुर जानना चाहिए|

1. कुमाऊ रेजिमेंट देश की सबसे पुरानी रेजिमेंटो में से एक है| कुमाऊ रेजिमेंट की स्थापना सन् 1788 में हुई थी| कुमाऊ रेजिमेंट का मुख्यालय रानीखेत में है|

2. कुमाऊ रेजिमेंट ने स्वतंत्रता के पहले और बाद कई युद्ध लडे जिनमे दोनों विश्व युद्ध, मराठा युद्ध (1803), पिन्डारी युद्ध (1817), भीलों के विरुद्ध युद्ध (1841), अरब युद्ध (1853), रोहिल्ला युद्ध (1854) तथा भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम, झॉंसी (1857) और सभी स्वतंत्रता के बाद के युद्ध लडे|

3. कुमाऊ रेजिमेंट के मेजर सोमनाथ शर्मा को ही भारत का पहला परम वीर चक्र मिला था| उन्हें यह मैडल 1947 के भारत पकिस्तान युद्ध के दौरान मरणोपरांत मिला था| कुमाऊ रेजिमेंट के ही मेजर शैतान सिंह को सन 1962 में भारत चीन युद्ध के लिए परम वीर चक्र मिला था| इसके अलावा कुमाऊ रेजिमेंट को 10 महावीर चक्र, 6 कीर्ति चक्र और 4 अशोक चक्र भी मिले हैं|

4. कुमाऊ रेजिमेंट की रेजिमेंट देवी गंगोलीहाट की माँ महाकाली हैं| कुमाऊ रेजिमेंट का युद्ध घोष भी कलिका माता की जय, बजरंग बलि की जय, दादा किशन की जय और जय दुर्गे नागा हैं|

5. 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान लदाख के चुशूल में कुमाऊ रेजिमेंट के जवानों ने बिना किसी हवाई मदद और तोपों की मदद से चीनीयो को भारत में आने से रोक लिया था| चीनी सैनिकों ने दुबारा हमला किया लेकिन कुमाउनी सैनिकों ने अपनी जगह नहीं छोड़ी| उस कम्पनी का नेतृत्व कर रहे थे परम वीर चक्र सम्मानित मेजर शैतान सिंह| उस दिन हर 5 चीनी सैनिक पर एक कुमाउनी सैनिक शहीद हुआ था| लेकिन सेना ने हार ना मानी| कहा जाता है की जब जवानों की गोलियां खत्म हो गई तो उन्होंने हाथों से लड़ना शुरू कर दिया था| अंत में जब तक एक भी सैनिक खड़ा रहा चीनी सैनिक उस पोस्ट पर कब्जा नहीं कर पाए थे| ऐसे जांबाज योद्धाओ ने न सिर्फ भारत का नाम रोशन किया अपितु उत्तराखंड और कुमाऊ रेजिमेंट का नाम भी रोशन किया|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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