मुग़लों की नाक काट कर वापस भेजा था इस रानी ने। पढ़िए रानी कर्णावती के बारे में

रानी कर्णावती पवार वंश के राजा, राजा महिपत शाह की पत्नी थी, महिपत शाह ही वह राजा थे जिन्होंने गढ़वाल की राजधानी देवलगढ़ से श्रीनगर स्थानांतरित करवाई थी। 1631 में महिपत शाह की मृत्यु के बाद राजा बने पृथ्वीपति शाह किन्तु 7 वर्ष की अलापयु में उनकी माँ रानी कर्णावती ने कार्यभार सम्भाला। जिस समय यह सब हुआ मुग़ल सल्तनत में शाहजहाँ थे। मुग़लों ने बहुत बार गढ़वाल पर नाकामयाब आक्रमण करे।

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इटली के लेखक और यात्री निकालो मुनिची ने अपनी किताब में लिखा है कि 30 हजार सैनिकों के साथ मुग़ल सेनापति नजाबत खान ने गढ़वाल पर चडाई कर दी। पहाड़ी क्षेत्र से अपरिचित मुग़ल सैनिकों का फायदा उठाते हुए रानी कर्णावती ने उन्हें घाटी में घेर लिया।अब मुग़ल सैनिक न पीछे मुड पाए न आगे जा पाए। धीरे धीरे मुग़ल सैनिकों के होसले परास्त होने लगे और सेनापति नजाबत खान ने रानी के पास संधि सन्देश भेजा किन्तु रानी कर्णावती ने उसे ठुकरा दिया। यद्यपि रानी कर्णावती ने मुग़ल सैनिकों को जीवन दान देने के लिए हामी भर दी किन्तु सारे मुग़ल सैनिकों को अपनी नाक कटवानी पड़ी, जिससे मुग़ल दरबार में यह सन्देश पहुंचा कि अगर वे नाक कटवा सकतीं हैं तो गर्दन भी कटवा सकतीं हैं। इसके बाद से रानी कर्णावती का उपनाम नाक-कटी-रानी पड गया।

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समसाम उद दौला शाह नवाज खान की लिखी पुस्तक मसिर-उल-उमारा में लिखा है कि गढ़वाल रियासत के सेनापति दोस्त बेग का इस लड़ाई में और रानी कर्णावती की सफलता में बहुत बड़ा हाथ था और वह रानी के ख़ास लोगों में से एक थे। दोस्त बेग गढ़वाल नरेश महीपति शाह के भी सेनापति थे। रानी कर्णावती ने काफी नहरों और गूल भी बनवाये थे जिससे दून घाटी में कृषि में बड़ा सुधार देखने को मिला। रानि कर्णावती के राज में बहुत से शहर फले फुले। राजपुर कैनाल का निर्माण भी रानी कर्णावती ने ही करवाया था। रानी कर्णावती के बाद पृथ्वीपति शाह ने अपनी माँ के पदचिन्हों पर चल कर ही राज करा।

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PRIYANSHU JAKHMOLA

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