पिछोड़ा- उत्तराखंड की वेशभूषा और संस्कृति का है अहम हिस्सा

महेंद्र सिंह धोनी की धर्मपत्नी साक्षी धोनी ने जब अपने विवाह में कुमाउनी पिछोड़ा पहना तो सारा देश पिछोड़ा का दीवाना हो गया| पिछोड़ा उत्तराखंड की वेशभूषा और ट्रेडिशनल ड्रेस का अहम हिस्सा है| जब कभी उत्तराखंड के पहनावे और आभूषण की बात आती है तो पिछोड़ा ही याद आता है| पिछोड़ा का  कुमाउनी संस्कृति में पिछोड़ा का बहुत महत्व है, पिछोड़ा सुहागनों की निशानी माना जाता है| इसे साडी के उपर पल्लू की तरह पहना जाता है| पिछोड़ा को विशेषकर शादी विवाह जैसे उपलक्ष्य पर पहना जाता है| पिछोड़ा केशरिया रंग की चुनरी होती है, जिसपर लाल रंग के डिजाईन बनाए जाते है| लाल रंग ऊर्जा की निशानी होता है वहीं केशरिया रंग सारे तत्त्व का मिश्रण होता है|

हस्त शिल्प का है नायाब नमूना:

बढ़ते व्यापार और विपणन की वजह से भले ही आज कल पिछोड़ा मशीनरी के द्वारा बनाये जाते है किन्तु हाथ से बने पिछोड़े की मांग हमेशा से ही रही है| डाई और प्रिंट करने के तरीके से पिछोड़े की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है|

केशरिया (पीला-लाल) रंग के पिछोड़े के लिए सफ़ेद रंग के सूती कपडे का इस्तेमाल किया जाता है| केशरिया रंग लाने के लिए किल्मोड़ा के पौध का पेस्ट बनाया जाता है, इस पेस्ट के साथ हल्दी और पानी मिला कर कुछ समय के लिए छोड़ दीया जाता है| इस पेस्ट को कपडे के साथ उबाला जाता है| जब पिछोड़ा अपना निर्धारित रंग का दिखने लग जाता है तो इसे छाया में सुखाया जाता है| अब इस पिछोड़े को लाल फूल रुपी डिजाईन से सजाया जाता है| इस डिजाईन के लिए पीठिया का इस्तेमाल किया जाता है| पीठिया एक प्रकार का पेस्ट होता है जिसे हल्दी के साथ पिस कर ताम्बे के बर्तन में रात भर रख कर बनाया जाता है| अब प्राय: मशीनो का इस्तेमाल किया जाता है|

एक्सपेरिमेंट और आधुनिकरण के चलते पिछोड़े में भी बहुत से बदलाव देखने को मिले है| हाल ही में कई नए गानों में पिछोड़े का नया रूप देखने को भी मिला| युवाओं में पिछोड़े की ओर रूचि हमारी संस्कृति के लिए उत्साहवर्धक है| उम्मीद है पिछोड़ा उत्तराखंड की संस्कृति और धरोहर की संरक्षण के लिए युवाओं में नया जोश भरेगा|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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