5 कारण, गैरसैण राजधानी क्यों बननी चाहिए?

राज्य पृथीकरण का मुख्य कारण था गढ़वाल और कुमाऊँ के पहाड़ी क्षेत्र का विकास जो कि उत्तर प्रदेश में रह कर कभी न हो पाया था। आज़ादी के बाद से पहाड़ में कुछ बदल नही पाया था । राज्य बनने के बाद भी विकास मैदानी शहर देहरादून, हरिद्वार कोटद्वार, रुद्रपुर जेसे शहर तक ही सिमित रह गया। ऐसे में प्रदेश की राजधानी पहाड़ में न हो तो पृथीकरण का क्या फायदा?

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राज्य आन्दोलन के समय से ही लाखों लोगों ने इसमें अपना योगदान दिया और कई सेनानियों ने तो अपनी जान हमारे पृथक राज्य के लिए समर्पित कर दी। उस समय भी यही तय हुआ था कि राजधानी गैरसैण ही बनेगी।

देहरादून और हल्द्वानी जेसे शहरों में प्रदुषण और जनसँख्या दिन प्रति दिन बढ़ रही है ऐसे में हमारे प्रदेश को प्लांड शहरों की जरुरत है। हाल ही में रिपोर्ट भी आई थी की देहरादून का प्रदुषण दिल्ली एन सी आर से भी ज्यादा बढ़ चूका है। रिपोर्ट के लिए यह क्लिक करें ऐसे में देहरादून जेसे खूबसूरत शहर की हालत दिल्ली जेसी होना लगभग तय है।

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अगर भौगोलिक परिस्थिति देखी जाए तो गैरसैण उत्तराखंड के मध्य में स्थित है ऐसे में राज्य के हर जिले से गैरसैण की दुरी लगभग सामान है। गैरसैण राजधानी बनने से राज्य के हर व्यक्ति के लिए राजधानी पहुंचना सुगम हो जाएगा। गैरसैण से राज्य के हर जिले से दुरी निचे टेबल में दर्शायी गयी है।

जहां भी किसी भी राज्य की राजधानी होती है वहां विकास होना तो तय है। ऐसे में पहाड़ में भी विकास के रास्ते खुल जाएंगे और आराम परस्त मंत्रियों को भी गैरसैण जाना पद जाएगा। और जिन्हें ऐसा लगता है की ऐसा करने से देहरादून का जो विकास हो रहा है वो रुक जाएगा तो ऐसा होगा नहीं।  देहरादून में 10 विधान सभा सीटें है तो देहरादून का विकास तो नहीं रुकेगा यह बात भी तय रही, क्योंकि वर्तमान समय में जो वोट देता है उसका विकास हो ही जाता है और जो नहीं देता उसको तो रोजगार के वायदे करने वाला मंत्री  भी रोजगार नहीं देता।

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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