5 कारण सहारनपुर उत्तराखंड का हिस्सा नहीं बनना चाहिए

हाल ही सरकार और कुछ बुधिजीविओं के बीच सहारनपुर को उत्तराखंड में विलय करने के लिए बहस छिड़ी हुई है| बहुत लोगों का मानना है कि सहारनपुर को उत्तराखंड का हिस्सा बना देना चाहिए और बहुत से लोगों का मानना इसके विपरीत है| सहारनपुर को उत्तराखंड का हिस्सा बनाने के पीछे मत है कि सहारनपुर के राज्य में विलय से उत्तराखंड में उद्योग से जुड़े विकास के नए रास्ते खुलेंगे| किन्तु हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और हमारा मानना है की जितने फायदे इस विलय से होंगे उससे ज्यादा नुक्सान होंगे| आज हम कुछ ऐसे ही कारणों पर चर्चा कर रहे है|

जातीय रूप से अलग:

सहारनपुर में मुख्यतः हिन्दू जाट और सुन्नी मुस्लिम रहते हैं| अल्पसंख्यकों में गढ़वाली, कुमाउनी और सिख आते हैं| वहीं पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में गढ़वाली और कुमाउनी हिन्दू रहते हैं| ऐसे में जातीय रूप से उत्तराखंड का और सहारनपुर का कोई मेल नहीं|

सांस्कृतिक रूप से:

उत्तराखंड की संस्कृति अपने आप में अनूठी है| और उत्तर प्रदेश से पूरी तरह अलग है, यही कारण था की उत्तराखंड राज्य अलग हुआ था| सांस्कृतिक तौर से सहारनपुर की कोई अलग पहचान नहीं है, ऐसे में सहारनपुर उत्तराखंड से बिलकुल अलग है|

भौगोलिक परिस्तिथियों से:

उत्तराखंड का मैदानी हिस्सा भी शिवालिक में आता है (हरिद्वार और रुद्रपुर)| वहीं सहारनपुर गंगा/यमुना से बने मैदानी क्षेत्र (उत्तरी मैदानी क्षेत्र) में आता है| उत्तराखंड में अधिकतर क्षेत्र पहाड़ी या पहाड़ी तलहटी वाला है| सहारनपुर और उत्तराखंड भौगोलिक रूप से भी अलग है|

भाषाई तौर पर भी:

उत्तराखंड के लोग मुख्यतः गढ़वाली या कुमाउनी बोलते हैं, दूसरी ओर सहारनपुर के लोग हिंदी या उर्दू बोलते हैं| हालांकि संस्कृत उत्तराखंड की राज भाषा है और उत्तराखंड में हिंदी में ही सारा आधिकारिक काम होता है| लेकिन हिंदी या उर्दू भाषी क्षेत्र की विलय से स्थानीय भाषाओँ को खासा नुक्सान हो सकता है और पहले से ही विलुप्त “गढ़वाली और कुमाउनी भाषाएँ” खतरे में आ जाएंगी| 

धर्म को देखते हुए:

उत्तराखंड के हर जिले में कम से कम 80% से ज्यादा हिन्दू जनसँख्या है और वहीँ सहारनपुर में 50-55% जनसँख्या हिन्दू धर्म से है| उत्तराखंड में जातीय गहमा गहमी देखने को आज तक नहीं मिली वहीँ सहारनपुर में जातीय दंगे कई बार भड़के हैं|

ऐसे में उत्तराखंड और सहारनपुर के विलय से उत्तराखंड को निश्चित ही मौद्रिक फायदा हो, किन्तु मौलिक हो इसपर जरुर संशय है| यही कुछ मूल कारण थे जिनकी वजह से उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग हुआ था, ऐसे में सहारनपुर का उत्तराखंड में मिल जाने का कोई औचित्य नहीं बनता|

RELATED:

कुमाऊ मंडल के मंदिर जिनकी है चार धाम के जितनी मान्यता

हरिद्वार से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 facts related to haridwar

क्या ख़ास है कुमाउनी होली में, सारा देश कुमाऊ का कायल

प्रमाण| गढ़वाली और कुमाउनी बोली नहीं ‘भाषा” हैं |

Please follow and like us:

About the Author

PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *