उत्तराखंड के महाकवि, जिन्हें मिला था सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार जनंपिठ पुरस्कार

हिंदी भाषा के जाने माने कवियों में से एक सुमित्रानंदन पन्त उत्तराखंड के थे| कौसानी, कुमाऊ में जन्मे पन्त साहित्य में अपने छायावादी प्रारूप के लिए काफी मशहूर थे| उनका जन्म २० मई 1900 को गंगादत्त पन्त के घर हुआ था| उनके जन्म के 6 घंटे बाद ही उनकी माँ का देहांत हो गया था| ऐसा कहा जाता है कि उन्हें अपने पिता और भाईओं से वह प्यार ना मिल पाया जो मिलना चाहिए था और यही बाद में उनकी रचनाओं में देखने को मिला| उनका पालान पोषण गाँव में ही हुआ और ग्रामीण भारत से उनके प्यार उनकी लिखी कविताओं में देखने को अक्सर मिल जाता है|

उनकी माता के देहांत के बाद उनके पिता ने उन्हें गाँव के एक शिव भक्त गुसाईं बाबा को दे दिया जिन्होंने उनका नाम गुसाईं दत्त रखा| उन्हें यह नाम बिलकुल पसंद नहीं था तो उन्होंने बाद में अपना नाम स्वयं ही सुमित्रा नंदन पन्त रख दिया|

पन्त का दाखिला सन1918 में बनारस के कुईंस कॉलेज में हुआ, जहां उन्होंने रबिन्द्र नाथ टैगोर और सरोजिनी नायडू की रचनाओं का अध्यन किया और उनसे वे काफी प्रभावित भी हुए| उसके बाद की पढ़ाई उन्होंने अल्लाहाबाद के मुइर कॉलेज से की|

उनकी प्रमुख रचनाए निम्न हैं:

  • चींटी, Chinti
  • चिदंबरा, Chidambara
  • वीणा, Veena(1927)
  • पल्लव, Pallav (1926)
  • ग्रंथि, Granthi(1929)
  • गुंजन, Gunjan (1932)
  • लोकायतन, Lokayatan
  • पल्लविनी, Pallavini
  • मधुज्वाला, Madhujwala
  • मानसी, Manasi
  • वाणी, Vaani
  • युगपथ, Yugpath
  • सत्यकाम, Satyakaam
  • अन्गुथिता, Anguthita
  • ग्राम्य, Gramya
  • तारापथ, Tarapath
  • मुक्तियाग्न्य, Muktiyagnya
  • युगांत, yugaant
  • स्वछन्द, swachand

सन 1968 में पन्त पहले हिंदी कवी बने जिन्हें जनंपिठ पुरस्कार (Jnanpith award) से समानित किया गया| “चिदंबरा” के लिए उन्हें यह सम्मान मिला| उन्हें अपनी रचना “काला और बुढ्ढा चंद” के लिए साहित्य अकादमी सम्मान भी मिला| सन 1961 में भारत सरकार ने पद्मा भूषण से भी पुरिस्कृत किया|

सुमित्रा नंदन पन्त का देहांत 28 दिसम्बर 1977 को अलाहाबाद में हुआ| उनके कौसानी में घर को आज म्यूजियम बना दिया गया है, जहां उनकी सभी रचनाये और उनसे जुडी वस्तुएं सहेज कर रखी गयी हैं|

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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