टिहरी नथ

टिहरी नथ: हर गढ़वाली महिला की शोभा

टिहरी नथ
Photo credit: Anil Chauhan/facebook

जब एक गढ़वाली दुल्हन अपनी दुल्हन की पोशाक़ मैं आती है तो देखने वालों की नज़रे उसकी नथ पर होती है जो की एक प्रमुख आभूषण है, नथ को गढ़वाली भाषा(न की बोली ) मैं नथुली कहा जाता है।

टिहरी नथ या ‘नथुली’ गढ़वाली महिलाओं का आकर्षण है जो अपनी मनोहर शैली के लिए जानी जाती  है। यह एक बड़ी नोज रिंग होती है  जिसे सोने और छोटे छोटे मोतियों से तैयार किया जाता  है। यह आभूषण चाँद के आकार में बहुत  खूबसूरती से ढाला जाता है।

टिहरी नथ गढ़वाली महिलाओं द्वारा पहना जाती  है और यह अपने  कलात्मक मूल्य के लिए प्रसिद्ध है। टिहरी नथ का उन्माद कुछ ऐसा है की लोग(खासकर महिलाए ) दुल्हन की बस नथ देखने के लिए उत्सुक होती हैं।

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टिहरी नथ का महत्व:

उत्तराखंड के लोग गहराई से अपनी संस्कृति में निहित हैं और नथ को एक महत्वपूर्ण आभूषण के रूप में देखते हैं, जो उनकी समृद्ध संस्कृति को दर्शाती है, टिहरी नथ की विशिष्टता यह है कि यह गढ़वाल के शहरी और ग्रामीण महिलाओं, दोनों द्वारा सुशोभित है। यह परंपरागत आभूषण, पुरानी और साथ ही युवा पीढियों में एकता, नैतिकता और पारंपरिक मूल्यों का एक उदाहरण है।

नथ को शादी की  निशानी के रूप में माना जाता है:

टिहरी नथ उत्तराखंड के अनमोल गहने में से एक है, जो शादी के समय पहनी जाती है, सामाजिक सम्मेलनों, पूजा, पारिवारिक कार्य और अन्य महत्वपूर्ण अवसरो पर । एक नथ का वजन और उसमे सुशोभित मोतीयो  की संख्या दुल्हन के परिवार की स्थिति से जुड़ी होती है।

नथ मामा की तरफ  से दुल्हन को एक उपहार होती  है:

गढ़वाली  परंपराओं के अनुसार, दुल्हन के मामा शादी के दिन नथ उपहार स्वरुप भेंट करते हैं। यह गणेश पूजा के समय पहनी जाती है जब  दुल्हन सभी शादी के गहने के साथ सजी है होती है । टिहरी नथ पहनने के बाद, दुल्हन और दूल्हे आग के सामने अपनी प्रतिज्ञा लेते हैं जो मिलाप को दर्शाता है।

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About the Author

Ashish Rawat

An Engineer by profession, thinker by choice and a pahari by birth. I am tech trainer and runs a coaching institute as well as an web development firm.

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