वीर भड़ माधो सिंह भण्डारी के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य। पढ़कर प्रभावित हो जायेंगे आप।

पहाड़ को काट कर अपने गांव मैं सड़क बनाने वाले दशरथ मांझी के बारे मैं आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के बारे मैं सुना है,  जिन्होंने  आज से ४०० वर्ष पूर्व पहाड़ का सीना चीर कर नदी का पानी अपने गांव लेकर आये। आइये जानते हैं वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के बारे मैं कुछ दिलचस्प तथ्य।

माधो सिंह भंडारी जिन्हे माधो सिंह मलेथा भी कहा जाता है उनका जन्म १५९५ में उत्तराखंड राज्य के टिहरी जनपद के मलेथा गांव में हुआ था । उन्होंने अपने पिता से प्रभावित होकर कम उम्र में ही श्रीनगर के शाही दरबार की सेना में भर्ती हो गयेऔर जल्दी ही अपने युद्ध कौशल से राजा महिपत शाह की सेना के सेना अध्यक्ष बन गए(१६२९-१६४६)।

कहा जाता है जब माधो सिंह भंडारी छुट्टियों में अपने गांव गए तो वह ये देख कर बहुत बेचैन हो गए की पानी के अभाव के कारन खेत सूख गए है और लोग अनाज, फल ,सबजियां उगाने में असमर्थ हैं ।तब  उन्होंने निर्णय लिए की वह मलेथा गांव में पानी लाकर रहेंगे।इस कार्य को पूर्ण लरने के लिए उन्होंने कुछ गांव वालो की मदद ली और एक सुरंग बनाई जिस से पानी को गांव से कुछ दूर बह रही चंद्रभागा नदी से गांव में लाया जा सके ।जब इतना सब करने से भी बात नहीं बनी तो उन्होंने अपने इकलौते पुत्र की बलि दे दी ।उनकी बहादुरी और त्याग की कथाएं आज तक बहुत प्रसिद्ध हैं और बार बार दोहराई जाती है।

जब तिब्बती (चीनी ) सेना के कर दिए दांत खट्टे।

माधोसिंह को तिब्बती सेना (अब चीन ) से लड़ने के लिये भेजा गया जो गढ़वाल की तरफ बढ़ रही थी कहा जाता था कि तिब्बती सैनिक माधोसिंह के नाम से ही घबराते थे। उनहोने तिब्बत  (चीन) और भारत के बीच हुई लड़ाई में बहादुरी दिखाई और चीन के राजा को शांति  के लिए तैयार किया  ।साथ ही साथ उन्होंने प्रसिद्ध मैकमोहन लाइन का निर्माण भी किया,इसी कारण  उन्हें वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के नाम से भी जाना जाता है।

 

हाल ही में उनके सम्मान में उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर माधो सिंह भंडारी के नाम पे रख दिया है।

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Ashish Rawat

An Engineer by profession, thinker by choice and a pahari by birth. I am tech trainer and runs a coaching institute as well as an web development firm.

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