इस देश के नागरिकों के पास पेसे तो हैं लेकिन खाने को कुछ नहीं, ऐसा क्या हुआ वेनेज़ुएला में, जानिये वेनेज़ुएला क्राइसिस के बारे में.

क्या ऐसा हो सकता है की किसी देश के नागरिकों के पास खाने को कुछ नहीं है लेकिन जेब में पेसे बहुत हैं? जी हाँ, ऐसे ही कुछ हालत हैं वेनेज़ुएला के। केसे? आइये जानते हैं।

 वेनेज़ुएला विश्व का सबसे अधिक मात्रा में  तेल उत्पादक देश है, अरब देशों से भी ज्यादा, किन्तु आज विश्व का सबसे में सबसे बुरे हाल किसी देश के हैं तो वो है वेनेज़ुएला। आइये जानते है ऐसा क्या हुआ इस देश में।

दसवी सदी के अंत में वेनेज़ुएला में कच्चे तेल की खोज हो चुकी थी, उस समय उस गाढे काले कच्चे तेल का इस्तेमाल दवाई और रौशनी के लिया हुआ करता था,हालाँकि असल में तेल का निष्कर्षण सन 1922 में शुरू हुआ, जब एक तेल के कुएं की खोज हुई। जब उसे खोदा गया तो एक बहुत बड़े फवारे के रूप में तेल बाहर निकला, उन्हें 9 दिन लग गये उस तेल को इकठ्ठा करने में। उसके बाद वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था ने एक नया मोड़ ले लिया।1928 तक वेनेज़ुएला विश्व का सबसे अधिक मात्र में तेल उत्पादक देश बन गया, वेनेज़ुएला की मुद्रा बोलिवर की कीमत दिन प्रतिदिन बढने लगी।

वेनेज़ुएला के ये आचे दिन ज्यादा दिन नही चले जल्द ही तेल के दाम कम होने लगे, कारन था उत्पादन ज्यादा होना। सारे आयल उत्पादक देशों ने फिर opec का गठन किया, जिसमे सबका तेल का उत्पादन की सीमा बाँध दी गयी, इस समय तक वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था संपूर्ण रूप से तेल पर निर्भर हो चुकी थी।

1973 के अरब-इसराली युद्ध के बाद अरब देशों ने अमेरिका को तेल देना बंद कर दिया, जिससे तेल की मांग वैश्विक बाज़ार में बढ़ गयी। और तेल के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गये, तेल उद्पादक देश अब 4 गुना मुनाफा कमा रहे थे। अभी तक वेनेज़ुएला ने तेल उत्पादन और निर्यात को सरकारी कर दिया था। वैश्विक बाज़ार में बढ़ते तेल के दाम से कुछ OPEC देशो ने अपने वायदे के खिलाफ जा कर ज्यादा तेल का निर्यात शुरू कर दिया, किन्तु ये मुनाफे की स्थिति ज्यादा दिन नहीं चली, मांग में जबरदस्त कमी की वजह से तेल के दाम फिर कम होने लगे।

कम मांग और कम दाम 1999 तक नहीं बढ़ पाए, पर जब विकाशशील देश भारत और चीन की ओर से मांग बढ़ी तो वैश्विक बाज़ार में तेल के दाम सुधेरने लगे। ह्यूगो चावेज़ अब वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति बने और उन्होंने बढ़ते दाम का फायदा उठाते हुए सामाजिक कार्यों में तेल से मुनाफे वाला पैसा लगाना शुरू किया, जिससे अपव्यय हो गया और समाजिक परिवर्तन भी देखने को नहीं मिला, उनके बाद कुर्सी संभाली  निकोलस मादुरो ने, उन्होने भी कुछ पहले जेसा ही किया और इस समय देश पूरी तरह से कर्जे में डूब गया था। प्राइवेट कम्पनियां दम तोड़ चुकी थी।

तेल के दाम 2014 से लगातार घट रहे हैं और आज वेनेज़ुएला की हालत बाद से बदतर बन चुकी है, लोगों के पास पेसे तो हैं किन्तु खाने के लिए कुछ नहीं है। अब क्या वेनेज़ुएला को तेल को छोड़ किसी और व्यापार में ध्यान देना चाहिए?

 

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PRIYANSHU JAKHMOLA

A "not at all serious" engineer, a technophile and a philanthropist. Knows 'f' of "few", wants to share it and grow it. Loves travelling and loves pahadi food.

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