आखिर क्यों मनाई जाती है गढ़वाल मैं 10 दिन बाद भी दिवाली (यगाश )।

यह बात तो सभी को मालूम है कि, दीपावली का त्योहार क्यों मनाया जाता है भगवान राम जब असुरराज रावण को मारकर अयोध्या नगरी वापस आए तब नगरवासियों ने अयोध्या को साफ-सुथरा करके रात को दीपकों की ज्योति से दुल्हन की तरह जगमगा दिया था। तब से आज तक यह परंपरा रही है कि, कार्तिक अमावस्या के गहन अंधकार को दूर करने के लिए रोशनी के दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं उत्तराखंड मैं दिवाली के 10   दिन बाद भी दिवाली मनाई जाती है जिसे एकादशी या यगाश कहा जाता है।

इससे पहले हमने वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी के बारे मैं आपको कुछ दिलचस्प तथ्य बताये, वो वीर भड़ माधो सिंह भंडारी जी ही थे जिनके कारण गढ़वाल मैं यगाश मनाई जाती है।  जैसे की हमने आपको अपनी पिछली पोस्ट (वीर भड़ माधो सिंह भंडारी) मैं बताया की जब तिब्बत सेना गढ़वाल राज्य मैं घुस चुकी थी तब यहाँ के राजा महिपत शाह ने सेनापति माधो सिंह भंडारी को मोर्चा सँभालने को भेजा।

उस समय गढ़वाल मैं दिवाली नहीं मनाई गई क्यूंकि युद्ध मैं कई सैनिक शहीद हो गए थे। इस युद्ध मैं जीत कर जीत कर माधो सिंह भंडारी एवं उनके सैनिक एकादशी को लौटे और उनके आने की ख़ुशी मैं एकादशी (यागाश ) धूम धाम से मनाई गई।

आज भी गढवाल मैं एकादशी (यगाश ) उसी धूम धाम से मनाई जाती है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं की यागाश वीर भड़ माधो सिंह भंडारी जी के युद्ध जीत कर लौट आने की ख़ुशी मैं मनाई जाती है।

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Ashish Rawat

An Engineer by profession, thinker by choice and a pahari by birth. I am tech trainer and runs a coaching institute as well as an web development firm.

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